मंगलवार, नवंबर 06, 2012

BJP के लिए सबसे ज्‍यादा खतरनाक कौन, जिन्‍ना का जिन्‍न या दाउद का IQ

सवाल खतरनाक से हो चले हैं. खतरा सवाल पूछने वालों पर भी मंडराने लगा है और इसका उदाहरण हाल ही में आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में भी देखने को मिला था. खैर यहां बात हो रही है बीजेपी की और सवाल यह कि बीजेपी के लिए सबसे ज्‍यादा खतरनाक कौन है, जिन्‍ना का जीन या दाउद का आईक्‍यू?


जिन्‍ना का जिन्‍न जिस तरीके से बीजेपी के दो वरिष्‍ठ नेताओं को पार्टी के भीतर आलोचना झेलने को मजबूर कर दिया था ठीक वैसी ही स्थिति पार्टी के वर्तमान अध्‍यक्ष नितिन गडकरी के कुख्‍यात अपराधी दाऊद इब्राहिम वाले बयान पर होते जा रही है. पार्टी के भीतर कई वरिष्‍ठ नेता गडकरी से इस्‍तीफे की मांग कर रहे हैं. इन नेताओं में यशवंत सिन्‍हा, जसवंत सिंह, गुरूमूर्ति शामिल हैं.

दूसरी ओर राम जेठमलानी ने साफ कहा है कि नितिन गडकरी को तत्‍काल अपने पद से इस्‍तीफा दे देना चाहिए. जेठमलानी ने कहा कि इस्‍तीफा दे देने से काई दोषी नहीं हो जाता. उन्‍होंने कहा कि गडकरी को अपने पद से इस्‍तीफा देकर जांच का सामना करना चाहिए. उनका पद पर बने रहना पार्टी के हित में नहीं है. इससे पहले महेश जेठमलानी ने भी गडकरी के विरोध में राष्‍ट्रीय कार्यकारणी से इस्‍तीफा दे दिया था.

बीजेपी के वरिष्‍ठ नेता जसवंत सिंह भी जिन्‍ना पर लिखे अपने किताब के कारण पार्टी से निकाल दिए गए थें. उनका पार्टी से निष्‍कासन उनके पुस्तक-विमोचन के 26 घंटे के अंदर ही हो गया था. जिस समय जसवंत सिंह को पार्टी से निकाला गया था उस समय लालकृष्ण आडवाणी संसदीय बोर्ड के सबसे वरिष्ठ सदस्य थें. इससे पहले आडवाणी जिन्‍ना पर दिए गए अपने बयान को लेकर अपना अध्‍यक्ष पद गवां चुके थें.

वर्ष 2005 में पाकिस्‍तान यात्रा के दौरान बीजेपी के तत्‍कालीन अध्‍यक्ष लालकृष्‍ण आडवाणी द्वारा जिन्ना को धर्म निरपेक्ष बताए जाने के बाद अध्यक्ष पद छोड़ने को विवश होना पड़ा था. हालांकि आडवाणी ने अपने बयान के पक्ष में पाकिस्तान की नेशनल असेम्बली में 11 अगस्त 1947 को दिये गये जिन्ना के प्रसिद्ध भाषण का हवाला दिया था जिसमे उन्होंने कहा था कि नये राष्ट्र पाकिस्तान में अब न कोई हिन्दू होगा और न मुसलमान. सभी पाकिस्तानी होंगे और राज्य सभी धर्मावलम्बियों से समान व्यवहार करेगा. वैसे यह अलग बात है कि जिन्ना की इस सलाह पर पाकिस्तानी हुक्मरानों ने कभी अमल नहीं किया.

अब यह देखना दिलचस्‍प होगा कि बीजेपी के वर्तमान अध्‍यक्ष नितिन गडकरी दाऊद इब्राहिम को लेकर दिए गए अपने बयान के बाद कितने समय तक पार्टी के अध्‍यक्ष पद पर बने रहते हैं.

सोमवार, जुलाई 16, 2012

...तो जान खतरनाक ढंग से सस्ती हो सकती है


ऑनर किलिंग के एक मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि खाप पंचायतें अवैध हैं. प्रेमी जोड़े को प्रशासन सुरक्षा दें. कोर्ट के इस टिप्‍पणी के बाद उम्‍मीद है चहकते प्रेमी युगल पर पुलिस डंडा नहीं बरसाएगी और खाप पंचायतों पर भी कोर्ट का असर दिखेगा. खाप पंचायतों की ओर से जारी होने वाले कातिलाना फरमानों पर अंकुश लग जाएगी.

जब प्रतिष्ठा विकृत ढंग से जान से प्यारी हो जाए तो जान खतरनाक ढंग से सस्ती हो सकती है. यह एक सच्‍चाई है और यह सच्‍चाई कई प्रेमी युवा शरीर पर बड़ी क्रूरता के साथ उकेड़ी गई. अगर आंकड़ों की बात कहें तो पिछले कुछ वर्षों में भारत के विशाल ग्रामीण क्षेत्र में हर वर्ष एक हजार से ज्यादा युवा अपने ही लोगों के हाथों मार डाले जाते हैं. इनमें से 900 तो अकेले अन्न उगाने वाले पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मारे जाते हैं.

इज्‍जत के लिए कत्ल ('ऑनर किलिंग') के इस चलन के लिए प्रत्यक्ष तौर पर 'जाति या धर्म की पवित्रता की रहना' का बहाना बनाया जाता है. ये सारी हत्याएं शादियों से जुड़ी होती हैं, और इनका स्त्रोत होता है, हर समुदाय के अपने-अपने अजीबोगरीब नियमों का ढांचा जो जातियों की परतों में बंटे समाज में विजातीय विवाह के ढांचे पर सवार होता है.

जिस देश में प्रेम विवाह को एक विशेष प्रकरण माना जाता है, अपने जीवनसाथी का चुनाव करने की सजा आम तौर पर उन लोगों का परिवार ही तय कर देता है, जो ऐसा करने की हिमाकत करते हैं. कुख्यात खाप पंचायत जैसे परंपरागत जातिगत संगठनों से समर्थन प्राप्‍त, जिसमें हरियाणा में एक पूर्व मुख्यमंत्री तक शामिल हैं, यह अपराध करने वाले अपने आपको सामाजिक व्यवस्था का रक्षक समझते हैं.

हालांकि अभी दो दिन पहले ही हरियाणा की खाप पंचायत ने कन्‍या भ्रूण हत्‍या रोकने की दिशा में साकारात्‍मक पहल की घोषणा की है. पहली बार एक महिला इस पंचायत में बोली. इसे आप सुखद बदलाव के रुप में देख सकते हैं लेकिन बदलते बदलते पता नहीं कितनी अजन्‍मी बच्‍ची और कितने प्रेमी युगल अपनी जान खो देंगे.

दलित बस्‍ती में ही सफाई करने क्‍यों पहुंच जाते हैं नेता...

बीजेपी हो या कांग्रेस या आम आदमी पार्टी सभी अपने सोच से सामंती व्‍यवस्‍था के पोषक हैं। अगर ऐसा नहीं होता तो कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वॉड...